उत्तरप्रदेश में जन्मी काव्य रचनाकार महादेवी वर्मा जी की कविताएं

Posted by Lucky Jack
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Jul 24, 2019
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काव्यों में महान श्री महादेवी वर्मा जी का जन्म उत्तरप्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद में सन्  26 मार्च 1907 को हुआ था| उनके जन्म के संबंध में सबसे बड़ी तो यह थी कि उनके परिवार में 200 साल पहले किसी कन्या का जन्म नहीं हुआ था।  वर्मा जी जन्म के बाद ही इनके घर में पबरा खुशी का माहौल छा गया और इनको देवी का रूप माना जाने लगा। जिसकी वजह से इनके दादा जी के द्वारा इनका नाम “महादेवी वर्मा” रख दिया गया| इनके पिता का नाम गोविंद प्रसाद वर्मा था जो कि विद्यालय में प्राध्यापक के पद पर कार्यरत थे और इनकी माता श्री हेमरानी देवी बहुत धार्मिक प्रकृति की महिला थीं। शाथ ही वेदों व पुराणों में बहुत रूचि रखती थीं महादेवी वर्मा जी के शैक्षिक जीवन की शुरूआत इंदौर से हुई और उस समय बाल विवाह का प्रचलन था। जिसकी वजह से इनका बचपन में ही विवाह 1916 में हो गया था और उस वक्त इनके पति मात्र 10वीं कक्षा में पढ़ रहे थे।  इलाहबाद के क्रास्थवेट कॉलेज में दाखिले के बाद वह हॉस्टल में रहीं| महादेवी वर्मा जी ने केवल 7 वर्ष की अवस्था में ही लेख लिखना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उनके द्वारा लिखी गयी कवितायेँ  लोगों में काफी प्रचलित होने लगीं| मैट्रिक की परिक्षा पास कतरने के बाद ही  महादेवी जी एक अच्छी कव्य रचनाकारों में गिनी जाने लगी। 

महादेवी वर्मा जी ने Allahabad University से  Sanskrit में M.A की परीक्षा सन् 1932 में पास की  और इस दौरान उनकी रचना नीहार व रश्मि कविताओं का संग्रह प्रकाशित हो चुका था। 

महादेवी वर्मा जी ने अपने कव्यों में वेदना और अनुभूतियों को बहुत गहराई से चित्रित किया। वर्मा जी के प्रसिद्ध काव्य संग्रहों Mahadevi Verma Poems में नीहार, रश्मि और नीरजा शामिल हैं। न केवल काव्य में बल्कि गद्यांशों के साहित्य में भी महत्वपूर्ण योगदान किया। उनके प्रमुख गद्यांशों में स्मृति की रेखाएं,अतीत के चलचित्र,  पथ के साथी, शृंखला की कड़ियाँ और मेरा परिवार  नामक साहित्य शामिल हैं।

महादेवी वर्मा जी का निधन 11 सितम्बर सन् 1987 को इलाहबाद में हुआ। महादेवी वर्मा जी ने अपने जीवन में कार्यों की शुरूआत अध्यापिका से की। जिसमें वह आखिरी समय तक प्रयाग महिला विश्वपीठ की प्राध्यानाध्यापक रहीं। महादेवी वर्मा जी ने महिला समाज सुधारक के रूप में अनेकों काम किये। आपको बता दें कि सबसे पहले  वर्मा जी ने ही महिला कवि सम्मेलन को शुरु करवाया। हमारे भारत में पहली बार महिला कवि सम्मेलन सुभद्रा कुमारी चौहान जी की अध्यक्षता में पूरा हुआ। 

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